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चागोस पर ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच समझौता अटका, डोनाल्ड ट्रंप ने वापस ले लिया था समर्थन

 Published : Apr 11, 2026 06:08 pm IST,  Updated : Apr 11, 2026 06:08 pm IST

Chagos Islands Dispute: ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच चागोस द्वीप समझौता अमेरिका के समर्थन वापस लेने से रुक गया है। इसके साथ ही डिएगो गार्सिया बेस की सुरक्षा, संप्रभुता और स्थानीय चागोसियन की वापसी का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।

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चागोस द्वीप पर ब्रिटेन ने मॉरीशस के साथ समझौते को रोक दिया है। Image Source : AP

Chagos Islands Dispute: ब्रिटेन और मॉरीशस के बीच चागोस द्वीपों को लेकर हुआ समझौता अब अनिश्चितकाल के लिए रोक दिया गया है। बता दें कि ये वही द्वीप हैं जहां अमेरिका-ब्रिटेन का एक महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा स्थित है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार द्वारा समर्थन वापस लेने के बाद ब्रिटेन को यह कदम उठाना पड़ा है। ब्रिटिश सरकार ने शनिवार को माना कि संसद में इस समझौते को मंजूरी देने के लिए जो विधेयक लाया गया था, वह समय सीमा के भीतर पारित नहीं हो सका और अब वह समाप्त हो गया है। यह मामला ब्रिटेन और ट्रंप प्रशासन के बीच बढ़ते तनाव का एक और उदाहरण माना जा रहा है।

ट्रंप ने पहले किया था समझौते का समर्थन

ट्रंप ने शुरुआत में इस समझौते का समर्थन किया था, लेकिन जनवरी में उन्होंने रुख बदलते हुए सोशल मीडिया पर इसे 'बहुत बड़ी मूर्खता' करार दिया था। यह समझौता हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया द्वीप से जुड़ा है, जहां अमेरिका और ब्रिटेन का संयुक्त सैन्य अड्डा है। ब्रिटिश सरकार ने कहा कि डिएगो गार्सिया उनके लिए एक बेहद अहम रणनीतिक सैन्य ठिकाना है और इसकी सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। सरकार का कहना है कि यह समझौता बेस के दीर्घकालिक भविष्य की सुरक्षा के लिए सबसे अच्छा तरीका था, लेकिन इसे तभी आगे बढ़ाया जाएगा जब अमेरिका का समर्थन मिले।

'समझौता रोकने के अलावा कोई विकल्प नहीं'

ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय के पूर्व प्रमुख साइमन मैकडोनाल्ड ने कहा कि जब अमेरिका के राष्ट्रपति खुलकर विरोध कर रहे हों, तो सरकार के पास समझौता रोकने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। उन्होंने कहा कि यह समझौता फिलहाल 'ठंडे बस्ते' में चला गया है। बता दें कि चागोस द्वीपसमूह में 60 से अधिक छोटे द्वीप शामिल हैं, जो 1814 से ब्रिटिश नियंत्रण में हैं। डिएगो गार्सिया द्वीप पर स्थित यह सैन्य अड्डा वियतनाम, इराक और अफगानिस्तान युद्धों सहित कई अमेरिकी सैन्य अभियानों में इस्तेमाल होता रहा है।

ब्रिटेन में कुछ धड़े कर रहे समझौते का विरोध

समझौते के तहत ब्रिटेन को मॉरीशस को इन द्वीपों की संप्रभुता सौंपनी थी, लेकिन डिएगो गार्सिया बेस को 99 वर्षों के लिए पट्टे पर रखना था। ब्रिटिश सरकार का कहना था कि इससे बेस को अंतरराष्ट्रीय कानूनी चुनौतियों से सुरक्षा मिलती। हाल के वर्षों में संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने ब्रिटेन से इन द्वीपों को मॉरीशस को लौटाने की अपील की है। ब्रिटेन की विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी और रिफॉर्म यूके ने इस समझौते का विरोध करते हुए कहा कि इससे चीन और रूस जैसे देशों के हस्तक्षेप का खतरा बढ़ सकता है। उन्होंने ट्रंप प्रशासन से भी इस समझौते का समर्थन वापस लेने की मांग की थी।

चागोसियन कर रहे हैं द्वीप पर वापसी की मांग

1960 और 1970 के दशक में इन द्वीपों से हटाए गए स्थानीय चागोसियन लोग आज भी यहां पर अपनी वापसी की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि उनसे सलाह नहीं ली गई और इस समझौते से उनके घर लौटने की उम्मीद और कमजोर हो सकती है। खास बात यह है कि करीब 10,000 विस्थापित चागोसियन और उनके वंशज आज ब्रिटेन, मॉरीशस और सेशेल्स में रहते हैं और वर्षों से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।

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